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शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

वैकल्पिक मीडिया : अर्थ एवं अवधारणा

वैकल्पिक मीडिया: अर्थ एवं अवधारणा 
डॉ. रामशंकर 'विद्यार्थी'
जीवंत समाज के अभिन्न अंग के तीव्र वैचारिकता के प्रतिफल का नाम ही पत्रकारिता है। प्रसिद्ध संचारविद् मार्शल मैक्लुहान का कथन है कि- संचार के क्षेत्र में हर दिन कोई न कोई उपलब्धि हासिल की जाती है। ऐसे में मीडिया ने भी अपनी रंगत बदली है। आज पत्रकारिता के आयामों में बदलाव तो हुआ ही साथ ही उसके शस्त्र और औजारों में भी परिवर्तन हुआ। दुनिया भर में इक्कीसवीं सदी के लगभग प्रारंभ में एक खास मीडिया का प्रादुर्भाव हुआ जिसे वैकल्पिक मीडिया के नाम से जाना जाता है।
मुख्यधारा की मीडिया के रूप में तमाम व्यवसायिक निहितार्थ वाले समाचार चैनल, अखबार घूम जाते हैं, जो दिन भर एक्सक्लूसिव के नाम पर अपना राग अलापते रहते हैं। इस भागमभाग की स्थिति ने हमें अनेक  समाचारों से वंचित कर दिया है। मुख्यधारा की मीडिया आज सारे समाज पर छायी हई है, किन्तु नीतिगत मसलों पर इसमें गंभीर सामग्री का एक सिरे से अभाव दिखाई देता है। नीतिगत एवं सामाजिक मसलों को मेनस्ट्रीम मीडिया सतही रूप में पेश करता है, जबकि गैर मुनाफे की मीडिया में सामाजिक मुद्दों का गंभीर विश्लेषण पढ़ने, देखने व समझने को मिलता है।

वैकल्पिक मीडिया की अवधारणा
फ्रांस में सर्वप्रथम मई 1968 में छात्र और श्रमिकों के विद्रोह के बाद वैकल्पिक(Alternative) अख़बार दिखाई पड़ा। इसका प्रथम प्रकाशन 18 अप्रैल 1973 ई. को आया जिसमें इसके प्रकाश में आने का उल्लेख था हालांकि भारतीय संदर्भ में पत्रकारिता की शुरूआत (गांधी और अंबेडकर की पत्रकारिता) ही वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में हुई है। अतः इस शब्द की व्युत्पत्ति के संदर्भ में स्पष्टता नहीं है।
वैकल्पिक मीडिया में वैकल्पिक शब्द से तात्पर्य है कि वह सब जो मुख्यधारा के मीडिया के स्रोतों से प्राप्त न हो। वैकल्पिक मीडिया को पारिभाषित करते हुये कुछ तथ्य सामने आये हैं जो निम्नलिखित हैं-
“ऐसा समाचार प्रकाशक जो व्यापारिक न हो, उसके विचार या मुद्दे लाभ पर केंद्रित न हो, उसके विचारों एवं समाचारों के प्रकाशन का एक उद्देश्य हो।
उसके प्रकाशन की सामग्री पूर्णतः सामाजिक उत्तरदायित्व पर निर्भर हो। उसके लेखन में एक विशेष प्रकार का बोध होता हो।
समाचारों का प्रकाशन लगभग जनमानस को प्रेरित करने वाला हो।
वैकल्पिक मीडिया छोटे-छोटे उद्देश्यों पर केंद्रित रहता है। इसका कवरेज नियमित नहीं होता है।
प्रकाशन लगभग समाचार उपलब्धता पर केंद्रित रहता है।” (Pinzon,Ramirez ,‘Alternative Media: 2007)
समाज विज्ञान विश्वकोश के अनुसार- वैकल्पिकता किसी मीडिया की स्थिति जरूरी नहीं स्थायी ही हो। जैसे किसी मुद्दे को लेकर मीडिया के किसी भी वैकल्पिक माध्यम द्वारा किसी मुद्दे को मुखरता स्थापित की जा रही हो और मुद्दों की पूर्ति हो गयी हो तो वह मीडिया समाप्त भी हो सकता है या वह परिस्थिति सापेक्ष भी हो सकता है। मसलन, “किसी अधिनायकवादी सत्ता का विरोध कर रहे आंदोलन का दृष्टिकोण पेश करने वाला मीडिया वैकल्पिक की श्रेणी में माना जाता है। पर, उस सत्ता को अपदस्थ करके सरकार में आने वाली राजनीतिक ताकत का समर्थन करने वाला वही मीडिया वैकल्पिक होने का श्रेय लेने में नाकाम हो सकता है।” (समाज विज्ञान विश्वकोश, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि. वर्धा, पृष्ठ संख्या-1783)
राजस्थान विश्वविद्यालय में ‘नई चुनौतियाँ और वैकल्पिक मीडिया’ पर परिसंवाद में अनुराग चतुर्वेदी कहते हैं कि सीमांत लोगों की बात करना ही वैकल्पिक पत्रकारिता है, और यह बात जिस माध्यम से की जाय वे वैकल्पिक माध्यम के अंतर्गत आते हैं। 
वैकल्पिक मीडिया से आशय ऐसी मीडिया (समाचार पत्र-पत्रिका, रेडियो, टीवी सिनेमा व इंटरनेट आदि) से है, जो मुख्यधारा की मीडिया के प्रतिपक्ष में वैकल्पिक जानकारी प्रदान करती है। वैकल्पिक मीडिया को मुख्यधारा-मीडिया से हटकर देखा जाता है। वैकल्पिक मीडिया के अंतर्गत उन खबरों को प्रसारित किया जाता है, जिन्हें मुख्यधारा के मीडिया में स्थान नहीं दिया जाता है जबकि वे जन सरोकारों से पूर्णतः जुड़ी होती हैं। इसे विभिन्न माध्यमों में देखा जाता है। बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, दीवारों पर लिखे वक्तव्य, कैटलाग, कार्टून, मेले में लगी प्रदर्शनी, सामुदायिक रेडियो आदि वैकल्पिक मीडिया का अंग हो सकता हैं।


  

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